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हिमालय का प्रहरी 'कालापानी' पोस्ट, -40 डिग्री सेल्सियस तापमान में चट्टान बने भारतीय जांबाज

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Niraj Kumar
 Published : Mar 22, 2026 05:26 pm IST,  Updated : Mar 22, 2026 05:29 pm IST

कालापानी पोस्ट साल में ज्यादातर समय 5 से 10 फीट बर्फ की चादर से ढकी रहती है। यहां का तापमान शून्य से -30 से -40 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर जाता है।

Kalapani post- India TV Hindi
कालापानी पोस्ट पर तैनात सेना के जवान Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली: भारतीय सेना के दमखम के आगे दुनिया की किसी और देश की सेना का टिकना मुमकिन नहीं है। जिन विषम परिस्थितियों में सेना के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करते हैं वह किसी तपस्या से कम नहीं है। हम आपको आज भारतीय सेना की एक ऐसी ही दुर्गम पोस्ट कालापानी के बारे में बताने जा रहे है। इस पोस्ट की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 13,000 फीट है। कालापानी पोस्ट भारतीय सेना की सबसे चुनौतीपूर्ण और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अग्रिम चौकियों में से एक है। यह पोस्ट मात्र एक सैन्य ठिकाना नहीं, बल्कि भारतीय संप्रभुता का वह अटूट हिस्सा है जहां प्रकृति की मार भी सैनिकों के हौसले के सामने बौनी साबित होती है।

10 से 15 फीट बर्फ की मोटी परत

बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरे एक अत्यंत ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में स्थित यह चौकी, साल के अधिकांश समय 5 से 10 फीट बर्फ की चादर से ढकी रहती है। यहां तापमान –30 से –40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और तेज़ बर्फीली हवाएं यहां जीवित रहने को ही सहनशक्ति की एक कठिन परीक्षा बना देती हैं। इन कठोर परिस्थितियों के बावजूद, भारतीय सेना के जवान भारत की सीमाओं और आस-पास के रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कालापानी पोस्ट पर पूरी मजबूती से मोर्चा संभाले रहते हैं। इस चौकी का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि यह एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है, जहां राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता होती है।

बर्फबारी में लॉजिस्टिक सप्लाई सबसे बड़ी समस्या

समुद्र तल से इतनी ऊंचाई पर पोस्ट को बनाए रखना न केवल एक सैन्य चुनौती है, बल्कि यह एक बड़े लॉजिस्टिक (रसद) अभियान से भी जुड़ा मामला है। भोजन, ईंधन, सर्दियों के कपड़े, मेडिकल हेल्प, गोला-बारूद और एडवांस हथियार सिस्टम जैसी जरूरी सप्लाई को अत्यंत दुर्गम इलाकों से होकर पहुंचाना पड़ता है। कई मामलों में, सप्लाई हेलीकॉप्टर उड़ानों, हाई-एल्टीट्यूडवाले वाहनों और सैनिकों द्वारा लंबे समय तक हाथ से सामान ढोने के अभियानों के संयोजन के माध्यम से पहुंचाई जाती है—विशेषकर भारी बर्फबारी के दौरान, जब रास्ते अवरुद्ध हो जाते हैं।

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Image Source : REPORTER INPUTकालापानी पोस्ट

खराब मौसम और भारी बर्फबारी के दौरान जब रास्ते बंद हो जाते हैं, तब हेलीकॉप्टर और विशेष 'हाई-एल्टीट्यूड' वाहनों के जरिए सामान पहुंचाया जाता है। भारतीय सेना यह सुनिश्चित करती है कि कालापानी पोस्ट पूरे वर्ष पूरी तरह से रसद से भरी रहे। सभी मौसम स्थितियों में परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए आधुनिक उपकरण, निगरानी प्रणालियां, कम्यूनिकेशन सिस्टम और हाई एल्डीच्यूड वाले युद्धक हथियार तैनात किए जाते हैं। सैनिकों को यहां तैनात किए जाने से पहले विशेष प्रशिक्षण और वातावरण के अनुकूल ढलने (acclimatization) की आवश्यकता होती है, क्योंकि ऑक्सीजन का निम्न स्तर और अत्यधिक ठंड जानलेवा हो सकती है।

अनुशासन, सहनशक्ति और अटूट संकल्प

कालापानी पोस्ट केवल एक सैन्य चौकी नहीं है; यह अनुशासन, सहनशक्ति और भारतीय सेना के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है, जिसके तहत वे पृथ्वी की सबसे विषम परिस्थितियों में भी राष्ट्र की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। यह पोस्ट यह संदेश देती है कि चाहे इलाका कितना भी कठिन क्यों न हो, भारतीय सेना देश की एक-एक इंच जमीन की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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